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Patna News: IGIMS में 500 बेड का नया अस्पताल तैयार, इमरजेंसी से ICU तक एक ही भवन में सुविधाएं

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | IGIMS पटना में करीब 280 करोड़ की लागत से तैयार 500 बेड के नए अस्पताल में इमरजेंसी, OPD, OT, ICU और आयुष्मान वार्ड समेत कई सुविधाएं मिलेंगी।

पटना, 27 अगस्त। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। करीब पांच साल की कवायद के बाद संस्थान का नया 500 बेड का अस्पताल भवन लगभग तैयार हो गया है। करीब 280 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छह मंजिला भवन को पांच ब्लॉक में विकसित किया गया है। नए अस्पताल के संचालन में आने के बाद IGIMS की कुल बेड क्षमता बढ़कर करीब 1700 तक पहुंचने की उम्मीद है।

नए भवन की खासियत सिर्फ अतिरिक्त बेड की संख्या नहीं है, बल्कि इसमें मरीजों के उपचार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाओं को एक ही जगह पर उपलब्ध कराने की योजना है। OPD, सामान्य वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर और जनरल इमरजेंसी जैसी सुविधाओं को भवन की संरचना में शामिल किया गया है। इसका सीधा फायदा गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें फिलहाल उपचार के दौरान अलग-अलग विभागों या भवनों के बीच जाना पड़ता है।

100 बेड की अलग इमरजेंसी

IGIMS में लंबे समय से इमरजेंसी में बेड की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कई बार बेड की कमी का सामना करना पड़ता है। नए अस्पताल में 100 बेड की अलग इमरजेंसी तैयार की गई है।

इस इमरजेंसी में डॉक्टरों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था रहेगी। 24 घंटे चिकित्सा निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे दुर्घटना, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल उपचार देने की क्षमता बढ़ सकती है।

नए इमरजेंसी ब्लॉक के शुरू होने के बाद मौजूदा व्यवस्था पर दबाव कम होने की उम्मीद है। खासकर गंभीर मरीजों को भर्ती करने और शुरुआती उपचार उपलब्ध कराने में अतिरिक्त क्षमता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

आयुष्मान मरीजों के लिए 50 बेड

नए अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए 50 बेड का अलग वार्ड भी तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार कराने वाले मरीजों के लिए भर्ती और इलाज की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में मरीज IGIMS पहुंचते हैं। ऐसे में अलग आयुष्मान वार्ड होने से योजना के लाभार्थियों के लिए अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

एक ही भवन में OPD, वार्ड और क्रिटिकल केयर

नए अस्पताल की डिजाइनिंग में मरीजों को कम से कम स्थानांतरण की जरूरत पड़े, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। संबंधित विभागों की OPD, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और क्रिटिकल केयर सेवाओं को एक ही भवन में समाहित किया गया है।

योजना के अनुसार संबंधित विभागों के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता भी उसी स्तर पर रखी जाएगी। 24 घंटे चिकित्सकीय ड्यूटी की व्यवस्था होने से भर्ती मरीजों की निगरानी में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इस व्यवस्था का खास फायदा गंभीर और चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों को हो सकता है। मरीज को बार-बार दूसरे विभाग या भवन में ले जाने की जरूरत कम होने से उपचार प्रक्रिया अधिक सुचारु हो सकती है।

बेड पर ही सैंपल कलेक्शन

नए अस्पताल में भर्ती मरीजों की पैथोलॉजिकल जांच को भी सुविधाजनक बनाने की तैयारी है। मरीजों को जांच केंद्र तक ले जाने के बजाय उनके बेड से ही सैंपल लेने की व्यवस्था की गई है।

गंभीर मरीजों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी हो सकती है। खासकर ऐसे मरीज जो चलने में असमर्थ हैं या जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है, उनके लिए बेडसाइड सैंपल कलेक्शन से अनावश्यक आवाजाही कम होगी।

इसके साथ रेडियोलॉजिकल जांच की सुविधाएं भी नए अस्पताल में उपलब्ध कराने की योजना है। इससे भर्ती मरीजों की आवश्यक जांच अस्पताल परिसर में ही कराना आसान होगा।

पांचवीं मंजिल पर मॉड्यूलर OT और ICU

नए भवन में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं को भी जगह दी गई है। पांचवीं मंजिल पर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और ICU की व्यवस्था की गई है। सर्जरी से पहले और बाद के मरीजों की निगरानी के लिए प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की व्यवस्था भी की गई है।

इसके अलावा हाई डिपेंडेंसी यूनिट यानी HDU और रिकवरी ICU की सुविधा रखी गई है। सर्जरी के बाद मरीजों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप करने में इन सुविधाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

हर मंजिल पर परिजनों के लिए वेटिंग हॉल

नए अस्पताल की योजना में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक फ्लोर पर वेटिंग हॉल तैयार किया गया है। इससे इलाज के दौरान परिजनों को बैठने के लिए निर्धारित स्थान मिल सकेगा।

अस्पताल परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील वातावरण में बेहतर परिसर और बैठने की सुविधा मरीजों और उनके परिजनों के अनुभव को कुछ हद तक सहज बना सकती है।

1700 बेड तक पहुंचेगी IGIMS की क्षमता

500 बेड का नया अस्पताल शुरू होने के बाद IGIMS की कुल क्षमता करीब 1700 बेड तक पहुंच सकती है। इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि संस्थान में पटना के अलावा बिहार के विभिन्न जिलों से गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

अतिरिक्त बेड मिलने से भर्ती मरीजों की क्षमता बढ़ेगी। वहीं 100 बेड की इमरजेंसी और 50 बेड के आयुष्मान वार्ड से अलग-अलग श्रेणी के मरीजों के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध होगी।

सबसे बड़ी चुनौती अब नए भवन को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने की होगी। भवन तैयार होने के साथ पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी, तकनीकी कर्मचारी और अन्य संसाधनों की उपलब्धता भी जरूरी होगी। यदि नई सुविधाओं का संचालन तय क्षमता के अनुरूप होता है, तो IGIMS पर बढ़ते मरीजों के दबाव को कम करने में यह विस्तार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

करीब पांच साल के इंतजार के बाद तैयार हुआ 500 बेड का यह अस्पताल IGIMS के लिए महज एक नया भवन नहीं है। यह संस्थान की उपचार क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब मरीजों और उनके परिजनों की नजर इस बात पर है कि नई सुविधाएं कब पूरी तरह चालू होती हैं और उन्हें नियमित रूप से इसका लाभ कब से मिलना शुरू होता है।

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नया भवन तभी बनेगा बड़ी राहत जब सेवाएं पूरी क्षमता से चलें

500 बेड की क्षमता बढ़ना निश्चित रूप से IGIMS के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिहार जैसे बड़े राज्य में गंभीर मरीजों की संख्या और बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे में नए बेड, अतिरिक्त इमरजेंसी और ICU जैसी सुविधाएं मरीजों के लिए राहत का आधार बन सकती हैं।

लेकिन किसी अस्पताल की क्षमता केवल भवन और बेड की संख्या से तय नहीं होती। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी, दवाएं, जांच सुविधाएं और 24 घंटे की प्रभावी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। नए भवन में आधुनिक सुविधाएं तैयार की गई हैं, इसलिए अब इनके नियमित और गुणवत्तापूर्ण संचालन पर ध्यान देना होगा।

यदि सभी सेवाएं पर्याप्त मानव संसाधन के साथ सुचारु रूप से शुरू होती हैं तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे IGIMS की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव कम होगा और बिहार के दूसरे जिलों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर उपचार सुविधा मिल सकेगी।

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